पटना : क्लास रूम में बच्चों को दंडित करना अब शिक्षकों को पड़ सकता है महंगा…जानिए कैसे

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सुरक्षा . मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक दंड के मामले में सीबीएसई सख्त
पटना : स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के प्रति शिक्षकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. सीबीएसई व अन्य शिक्षा बोर्ड की गाइडलाइन के मुताबिक बच्चों को शारीरिक दंड देना या मानसिक रूप से प्रताड़ित, उत्पीड़न आदि पूरी तरह प्रतिबंधित है. शिकायत मिलने की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है. स्कूल प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है. हालांकि इससे संबंधित प्रावधान व निर्देश पूर्व में जारी किये जा चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में हुई घटनाओं को देखते हुए सीबीएसई व अन्य बोर्ड सख्त हुए हैं.
शिक्षा का अधिकार अधिनियम में भी प्रावधान
शिक्षकों द्वारा बच्चों को दंडित किये जाने के मामले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है. यदि किसी शिक्षक के खिलाफ किसी छात्र को पीटने या  उत्पीड़न की शिकायत मिलती है, तो उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई भी हो सकती है.  यहां तक कि दोषी पाये जाने पर नौकरी पर भी संकट उत्पन्न हो सकता है.
अभिभावकों में जागरूकता जरूरी
बच्चों की सुरक्षा के प्रति न सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि अभिभावकों का भी जागरूक होना जरूरी है. इसके लिए सीबीएसई ने भी स्कूलों को गाइडलाइन जारी की है, ताकि समय-समय पर कार्यक्रमों का आयोजन कर छात्र व अभिभावकों को जागरूक किया जाये. आमतौर पर कई घटनाएं स्कूल व अभिभावकों तक ही सीमित रह जाती हैं. इस कारण दोषी के खिलाफ यथोचित कार्रवाई नहीं हो पाती है.
बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं : उपेंद्र कुशवाहा
पटना : स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का हर हाल में ख्याल रखा जाना चाहिए. पढ़ाई में थोड़ी ढिलाई बर्दाश्त की जा सकती है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं. ये बातें केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग के राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहीं. वे शनिवार को एसके मेमोरियल हॉल में प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के सातवें शिक्षक सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे.
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि बिहार में एजुकेशन हब बनाये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यू-डायस डाटा भरने की तिथि बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी गयी है. इससे पूर्व राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने समारोह का उद्घाटन किया.
इसमें विशिष्ट अतिथि राज्य के कृषि मंत्री प्रेम कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह, विधायक संजीव चौरसिया, आईएएस अधिकारी डी सेहरा व सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी एलएल मीणा ने भी विचार रखे. एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्माइल अहमद ने स्वागत भाषण किया. छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये. समारोह में राज्य के विभिन्न जिलों समेत झारखंड व बंगाल स्थित विभिन्न स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
संत जॉन हाईस्कूल महेंद्रू व डॉन बास्को स्कूल दरभंगा  को बेस्ट स्कूल का अवार्ड : समारोह में राज्य समेत आसपास के विभिन्न राज्यों के स्कूलों से आये करीब 3000 हजार शिक्षक- शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया. वहीं, महेंद्रू के संत जॉन हाईस्कूल तथा दरभंगा के डॉन बास्को स्कूल को बेस्ट स्कूल का अवार्ड दिया गया. अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्रियों और अधिकारियों ने सभी को सम्मानित किया.
बिहार में पिछड़ेपन का कलंक मिल कर मिटाना है : कृष्ण नंदन वर्मा
समारोह में राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने कहा कि आमतौर पर बिहार को पिछड़े की श्रेणी में गिना जाता है. लेकिन, सरकारी व प्राइवेट स्कूलों को मिल कर यह कलंक मिटाना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य से गरीबी तभी दूर होगी, जब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी. अत: सरकारी स्कूलों के शिक्षक थोड़ी कृपा करें, थोड़ी कृपा दिखाये, ताकि इस राज्य का भी कायाकल्प हो जाये.
स्कूल बंद करने के खिलाफ शिक्षकों का राजभवन मार्च
पटना : शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 1190 स्कूलों को बंद करने का आदेश दिये जाने के खिलाफ स्कूलों के निदेशक व प्राचार्यों ने शनिवार को राजभवन मार्च किया. यह आयोजन बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से किया गया.
कार्यक्रम संजय गांधी जैविक उद्यान के गेट संख्या-1 से आरंभ हुआ. मार्च आरंभ होने से पहले एसोसिएशन के पदाधिकारियों को पुलिस का सामना करना पड़ा. हल्की नोक-झोंक भी हुई. इस बीच स्थानीय एसडीओ के साथ एसोसिएशन की वार्ता हुई. इसके बाद स्कूलों के निदेशक और प्राचार्य राजभवन की ओर बढ़े. राजभवन में अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा. तत्पश्चात एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन सौंपा. आरंभ में उद्यान में एक सभा हुई.
इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ डीके सिंह व अन्य ने मांगों पर चर्चा की. एसोसिएशन की ओर से मार्च 2019 तक किसी भी प्राइवेट स्कूल को परेशान नहीं किया जाने, सभी प्राइवेट स्कूलों को प्रस्वीकृति प्रदान करने तथा यू-डायस की समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की गयी है.
इस दौरान एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एसएम सोहैल, राजीव रंजन समेत बिहटा, दानापुर, मसौढ़ी, फतुहा व अन्य इकाइयों के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे. एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यदि दो दिनों में स्कूलों को बंद करने का आदेश वापस नहीं लिया गया, तो एसोसिएशन राज्यपाल, मुख्यमंत्री व शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मिल कर अपनी बात को रखेगा.
स्कूलों की प्रस्वीकृति को  लेकर संघ का
सांकेतिक धरना कल
पटना. जिले के प्राइवेट स्कूलों को बंद किये जाने की नोटिस के खिलाफ भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ 25 सितंबर को सांकेतिक धरना देगा. इसकी जानकारी संघ के राष्ट्रीय संयोजक सह अध्यक्ष भारत मानस ने दी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में जिले के 1649 स्कूलों ने प्रस्वीकृति के लिए आवेदन किया था. उनमें से 308 स्कूलों को प्रस्वीकृति मिली.
शेष को सभी शिक्षकों के प्रशिक्षित नहीं होने की बात कहते हुए प्रस्वीकृति नहीं दी गयी. बाद में 68 स्कूलों को शो-कॉज किया गया. उन स्कूलों ने जवाब दे दिया. बावजूद उन्हें स्वीकृति नहीं मिली. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2019 तक की समय-सीमा निर्धारित की है. इसी बीच स्कूलों को बंद करने का नोटिस दिया गया है.